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UPTET 72825 CASE STATUS IN SUPREME COURT SHIKSHAMITRA CASE STATUS IN SUPREME COURT
UPTET - डी०एल०एड० प्रशिक्षण 2016 के लिए आदेश जारी
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ब्लॉक से लेकर वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय तक खेल
फैजाबाद : भले ही बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखाधिकारी ने तकरीबन तीन हजार शिक्षकों के वेतन से धनराशि कटौती का फरमान जारी कर विभागीय कर्मियों की गलती को दबाने का प्रयास किया हो लेकिन इस पूरे मामले में ब्लॉक से लेकर जिले तक के जिम्मेदारों ने खेल किया है। इसका ही नतीजा है कि आयकर विभाग को तकरीबन 50 लाख रुपये की चपत लगी। अगर समय से वसूली न हुई तो वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय भी आयकर के रडार पर आ जाएगा। साथ ही इसकी जद में आए शिक्षकों से ब्याज सहित वसूली की जाएगी। सत्र 2016-17 के दौरान शिक्षकों की सालाना इनकम से आयकर कटौती की प्रकिया शुरू हुई तो खंड शिक्षा अधिकारियों को वित्त व लेखा अधिकारी ने शिक्षकों का आयकर आगणन प्रपत्र समय से जमा करने के लिए कई बार निर्देश जारी किया। बावजूद इसके अधिकांश ब्लॉकों से शिक्षकों का इनकम टैक्स विवरण देर से मुख्यालय भेजा गया। सूत्र बताते हैं कि इस देरी के पीछे खास वजह रही। एक तो कई शिक्षकों ने देर से अपना आयकर आगणन प्रपत्र जमा किया तो कुछ खंड शिक्षाधिकारियों के कार्यालय पर आयकर से बचने की जुगत भी होती रही। सूत्र बताते हैं कि इस दौरान ब्लॉक के तार भी मुख्यालय से जुड़े रहे। इस कारण मुख्यालय पर भी शिक्षकों के आयकर की कमियों को पहले नजरंदाज कर दिया गया। छूट के साथ वेतन का भुगतान हो गया। वित्त एवं लेखाधिकारी के दावे पर विश्वास करें तो उन्होंने ही ऐसे कुछ मामले पकड़े व जांच कराई। गलत मिले तकरीबन तीन हजार शिक्षकों से लगभग 50 लाख रुपए की रिकवरी की जा रही है। वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय के जिम्मेदार इस गड़बड़ी के लिए खंड शिक्षाधिकारी कार्यालय को ही जिम्मेदार ठहराते हैं, दलील देते हैं कि खंड स्तर पर कम शिक्षकों के आयकर आगणन प्रपत्र की जांच आसानी से की जा सकती है पर मुख्यालय पर छह हजार शिक्षकों की जांच संभव नहीं है। इस बारे में वित्त एवं लेखाधिकारी एके अग्निहोत्री का कहना है कि गलत करने वालों को सजा देने के लिए मेरी पास कोई अधिकार नहीं हैं। ------------------------ विभागीय करतूत पर भड़के नेता फैजाबाद: यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन के जिला संयोजक बलबीर ¨सह कहते हैं कि शिक्षकों के साथ मजाक किया जा रहा है। उनका कहना है कि अगर किसी शिक्षक के प्रपत्र व मकान किराया भत्ता का दावा गलत था तो उसी वक्त आयकर की धनराशि काट ली जानी चाहिए थी। एक बार भुगतान करने के बाद रिकवरी करना अन्याय है। उन्होंने पूरे मामले में खंड शिक्षाधिकारी से लेकर वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय पर शिक्षकों के शोषण का आरोप लगाया। उन्होंने कार्यालयों में गलत करने वालों पर कार्रवाई की मांग की। कहते हैं कि वित्त एवं लेखाधिकारी की मिलीभगत से सब कुछ हो रहा है। उन्होंने जरूरत पड़ने पर शिक्षक हित में संघर्ष करने की बात भी कही।
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